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गरुड़ वाहन पर निकली प्रभु वेंकटेश की सवारी, भक्तों ने किए तिरुप्पवाड़ा विशेष उत्सव के दर्शन
इंदौर. 11 जुलाई. नीलांचल निवसाय परमात्मने, सुबद्रा प्राणनाथाय जगनाथाय मंगलम का स्तोत्र पाठ के,नादस्वरूम की मधुर धुन के साथ प्रभु वेंकटेश की आरती के स्वरों के बीच आज दोपहर प्रभु वेंकटेश के विशेष उत्सव तिरुप्पवाड़ा के दर्शन भव्यता के साथ श्रीलक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग पर श्रीमदजगदगुरु रामानुजाचार्य नागोरिया पिठाधिपति स्वामी श्रीविष्णुप्रपन्नाचार्यजी महाराज के मंगलाशासन में हुए.
आयोजन समिति के विनय भलिका महेंद्र नीमा,सत्यनारायण तोतला, अखिल माहेश्वरी ने बताया आज देवस्थान में दक्षिण भारत से आये भट्टर स्वामी व उनके सहियोगियों द्वारा तिरुप्पवाड़ा उत्सव मनाया गया. इसके अंतर्गत केले के पत्तो पर इमली के चावल के जिसको फुलेरा कहते है. फुलेरा से वेंकटेश बालाजी की प्रतिकृति का निर्माण किया गया जिसमे प्रभु का मुखारविंद, हस्त, पाद, जठर, वरन पूरे स्वरूप के दर्शन हो रहे थे.
विभिन्न प्रकार की मिठाइयों मालपुआ, चकली, जलेबी, लड्डू द्वारा श्रृंगार कर उन्हें शंक चक्र तिलक व वनमाला धराड़ कराई गई. यह प्रतिकृति इतनी सुंदर बनती है इसमे प्रभु श्री नारायण का स्वरूप साक्षात नजऱ आता है. देश भर से पधारे संतो के ने भी प्रभु के दिव्य स्वरूप का पूजन अर्चन आरती की.
इस विशेष उत्सव के दर्शन करने के लिए इंदौर ही नहीं दूर दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में पहुंचे. सभी भक्त गोविंद गोविंद का जय जय कार कर रहे थे. इस विशेष उत्सव क आज के यजमान राजेशजी कोठारी, मुकेश कचोलिया ने पूजन कर आरती की.

वेंकतरामना गोविंदा की जोरदार गूंज
रात्रि में भगवान वेंकटेश की सवारी गरुड़ वाहन पर आरूढ़ होकर गोविदा गोविंदा के जयघोष के साथ मंदिर परिसर में निकली गयी. जैसे ही सवारी के दर्शन पट खुले वेसे ही भक्तो की नजर भगवान की मोहिनी सूरत पर टिक गई ,यात्रा में व वेणुगोपाल संस्कृत पाठशाला के विद्याथीं श्रीसूक्त , पुरुष सूक्त , वेंकटेश स्तोत्र व वैदिक मंत्रोचार करते चल रहे थे. साथ ही सैकड़ो श्रद्धालुओं के बीच भजन गायक द्वारकदासजी मंत्री अपने भजनों दीवाना राधे का , चांदी चांदी हो गयी , आओ मेरी सखियों मुझे मेहँदी लगा दो,में तो बाके की बाकि हो गयी, पर युवा युवतियों की टोली को खूब आनंदित कर रहे थे.
मना वसंतोत्सव
इसके पूर्व आज देवस्थान में तिरुपति की तर्ज पर दक्षिण भारतीय पद्धत्ति द्वारा वसंतोत्सव देवस्थान में मनाया गया. इसमें प्रभु वेंकटेश व श्रीश्रीदेवी एव श्रीभुदेवी का सिर्फ केशर जल व चंदन चूरेसे आमरस से ही विशेष मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक किया गया. इस अवसर प्रभु वेंकटेश की स्वर्ण पुष्प से अर्चना भी की गई. सभी बाहर से पधारे संतो ने भी रजत कलशों से अभिषेक किया.


